प्रेम स्नेह और आशीर्वाद से भरा एक प्यारा सा शब्द है मां। जिसके इर्द-गिर्द बच्चे का पूरा जीवन होता है। मां के जीवन
का उद्देश्य ही अपने बच्चे के जीवन को बेहतर बनाना होता है ।वह निस्वार्थ भाव से अपना पूरा जीवन बच्चों के लिए समर्पित कर देती है। बच्चों की खुशी के लिए कोई भी दुख और संकट झेल लेती है ।खुद भूखा रहकर अपने मुंह का निवाला बच्चों को खिलाती है ।
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मां प्रथम गुरु - मां बच्चे की प्रथम गुरु है मां ही जीवन की प्रथम पाठशाला है। आजन्म मां अपने बच्चे को अच्छे बुरे का ज्ञान कराती है। अच्छाई के पथ पर अग्रसर करती है ।एक अच्छा और बेहतर इंसान बनाने के लिए मां अपना पूरा जीवन समर्पित कर देती है । 2.संस्कृति और परंपरा की वाहक - मां अपने बच्चों को अपनी संस्कृति सभ्यता और परंपरा से परिचित कराती है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में इनकी वाहक होती है ।शिष्टाचार और लोकाचार से अवगत कराती है। 3. नैतिक और व्यवहारिक शिक्षा - अपने बच्चों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा प्रदान करती है ।साथ ही व्यवहारिक ज्ञान भी देती है ताकि वह एक अच्छा इंसान बने और वास्तविक जीवन में सफल हो सके ।अच्छाई और बुराई से अवगत कराती है ।गलत राह पर जाने से रोकती है ।अपने बच्चे में अच्छे गुणों का बीजारोपण करती है । 4.शिक्षा के साथ संस्कार भी- हर मां बच्चों को शिक्षा तो प्रदान करती ही है साथ ही उसे संस्कार भी देती है ताकि वह शिक्षित और संस्कारी दोनों बने। शालीनता, मानवता ,शिष्टता आदि को उसक व्यक्तित्व में समाहित करती है। 5.मार्गदर्शक - बच्चों के लिए मां



Heart touching story
ReplyDeleteVery Nice......
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