Friday, 1 May 2020

Maa ki Mahima

मां एक प्यार भरा एहसास 



प्रेम स्नेह और आशीर्वाद से भरा एक प्यारा सा शब्द है मां। जिसके इर्द-गिर्द बच्चे का पूरा जीवन होता है। मां के जीवनका उद्देश्य ही अपने बच्चे के जीवन को बेहतर बनाना होता है ।वह निस्वार्थ भाव से अपना पूरा जीवन बच्चों के लिए समर्पित कर देती है। बच्चों की खुशी के लिए कोई भी दुख और संकट झेल लेती है ।खुद भूखा रहकर अपने मुंह का निवाला बच्चों को खिलाती है ।                     1. मां प्रथम गुरु -  मां बच्चे की प्रथम गुरु है   मां ही जीवन की प्रथम पाठशाला है। आजन्म  मां अपने बच्चे को अच्छे बुरे का ज्ञान कराती है। अच्छाई के पथ पर अग्रसर करती है ।एक अच्छा और बेहतर इंसान बनाने के लिए मां अपना पूरा जीवन समर्पित कर देती है ।                  2.संस्कृति और परंपरा की वाहक - मां अपने बच्चों को अपनी संस्कृति सभ्यता और परंपरा से परिचित कराती है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में इनकी वाहक होती है ।शिष्टाचार और लोकाचार से अवगत कराती है।                            3. नैतिक और व्यवहारिक शिक्षा - अपने बच्चों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा प्रदान करती है ।साथ ही व्यवहारिक ज्ञान भी देती है ताकि वह एक अच्छा इंसान बने और वास्तविक जीवन में सफल हो सके ।अच्छाई और बुराई से अवगत कराती है ।गलत राह पर जाने से रोकती है ।अपने बच्चे में अच्छे गुणों का बीजारोपण करती है ।             4.शिक्षा के साथ संस्कार भी- हर मां बच्चों को शिक्षा तो प्रदान करती ही है साथ ही उसे संस्कार भी देती है ताकि वह शिक्षित और संस्कारी दोनों बने। शालीनता, मानवता ,शिष्टता आदि को उसक व्यक्तित्व में समाहित करती है। 5.मार्गदर्शक - बच्चों के लिए मां

 








मार्गदर्शक होती है मां जीवनदायिनी ही नहीं है वरु्न जीवन का प्रेरणा स्रोत भी है। शिवाजी को महान योद्धा बनाने में उनकी मां जीजाबाई का योगदान स्मरणीय है ।बच्चे की जिस क्षेत्र में रुचि होती है उस क्षेत्र में आगे बढ़ाने में वह लगातार प्रयास करती है। इसके लिए उसे चाहे जहांँ से भी जानकारी क्यों ना निकालना पड़े                              6.सच्ची दोस्त - मां बच्चों की सच्ची दोस्त होती है हर सुख दुख में साथ देती है ।बच्चे जो बात डर और संकोच के कारण अपने पिता को नहीं बता पाते हैं वही मांँ के साथ दोस्त के रूप में हर  बात  निसंकोच शेयर कर लेते हैं ।एक सच्ची दोस्त के रूप में मां संकट और विपत्ति के समय संकटमोचक का कार्य करती है ।परेशानियों से जूझने का जज्बा देती है                             वास्तव में मां की महिमा अपार और अवर्णनीय है ।मां त्याग बलिदान और प्रेम का प्रतिरूप है ।मां ईश्वर का प्रतिनिधि है इसीलिए मां को ईश्वर के तुल्य माना गया है। जिंदगी की कड़ी धूप में मां का आंचल घनी छांव  है जहांबालक सभी दुख दर्द और परेशानियां , तनाव भूल जाता है ।मां का प्यार भरा  स्पर्श हर रोग की दवा है। मां एक प्यार भरा एहसास है।




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