समय
शर्मा जी ने
अपने इकलौते बेटे
की पढ़ाई लिखाई
में कोई कसर
नहीं छोड़ी बेटा
भी पढ़ने में
बहुत होशियार था
दोनों की ही मेहनत
रंग लाई ।
बेटा सुनील को
अमेरिका की एक
कंपनी में नौकरी
मिल गई इंजीनियरिंग
पूरी करते ही
वह अमेरिका चला
गया । सिर्फ
उसकी शादी के
समय वह भारत
आया था मुश्किल
से , तभी से
वहीं सेट है
। शर्मा जी
को बीच में
दिल का दौरा
पड़ा बायपास सर्जरी
करवानी पड़ी मां
ने अपने बेटे
से बार-बार
कहा बेटा आजा
तेरे पिताजी बार-बार तुझे
बहुत याद कर
रहे हैं बे
हार्ट के
पेशेंट है ना
जाने कब क्या
हो जाए ।
मां चिंता मत
करो पिताजी ठीक
हो जाएंगे हां
पैसे की जरूरत
हो तो मैं
अकाउंट में डाल
देता हूं ।
मुझे छुट्टी नहीं
है मैं नहीं
आ सकता। ठीक
है बेटा मत
आओ हमें पैसे
की जरूरत नहीं
है पेंशन से
काम चल जाता
है। बेटे का
महीने में तीन
चार बार फोन
हालचाल जानने के लिए
आ जाता है
यही क्रम चल
रहा है ।तभी
अचानक सुनील का
मां को अमेरिका
से फोन आया
वह कह रहा
था मां यहां
कोरोना नामक महामारी
फैल गई है।
पूरे अमेरिका में लॉक डाउन
कर दिया है
कंपनी ने छुट्टी
घोषित कर दी
है । यहां
तो जिंदगी और
मौत पर बात
आ गई है
सोच रहा हूं
कुछ दिनों के
लिए गांव आ
जाऊं । हां
जरूर यह कहकर
मां ने फोन
रख दिया सुनो
जी कहां हो
खुशखबरी है हमारा
बेटा घर आ
रहा है ।
यह कहते हुए
उन्होंने पूरे घटना
शर्मा जी को
सुना दी शर्मा
जी के चेहरे
पर इतनी खुशी
ना देख कर
उन्होंने कारण पूछा
क्या बात है
कुछ सोच रहे
हो शर्मा जी
ने कहा मन
ही मन सोच
रहे थे आज
की पीढ़ी कितनी
मतलबी हो गई
है जब मैं
मौत के कगार
कगार था तो
लाख गिडगिडाने गिर
जाने पर भी
बेटा नहीं आया। आज
जबश्रीमती जी को
भी उनकी बात
सही लगी किंतु
अपनी भावनाओं और
विचारों पर कंट्रोल
करती हुई बे
बोली जाने भी
दो आप भी
कौन सी पुरानी
बातें लेकर बैठ
गए । बच्चे
चाहे कितनी गलती
करें किंतु माता
पिता के दिल
और घर के
दरवाजे उनके लिए
हमेशा खुले हैं
यह कहते हुए
उन्होंने अपनी आंखों
के किनारों पर
आए आंसुओं को
बहने से रोक
दिया ।.
श्रीमती कीर्ति
दुबे 10 विजयनगर लाल चौकी
खंडवा



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