Tuesday, 28 April 2020

SAAS BAHU KA RISHTA

 सोच का फर्क


सुबह  के  काम  से  निपट  कर  कालोनी  की  महिलाएं  पार्क मे  बैठकर  गपशप  लगा  रही थी।
इसी  बीच शर्मा  बहिन  जी चहकते   हुए  बोली  खुशखबरी  है मेरी  जूही  का रिश्ते  की  बात  पककी  हो  गई  हैं।
 एक  ही  लडका  है,  सरकारी  नौकरी  है,  उसके  पिताजी के पास  लंबी  चौड़ी  जमीन  जायदाद है।कहीं  कोई  कमी  नहीं है।राज  करेगी  मेरी   बेटी।  मैंने   तो  स्पष्ट   कह  दिया  कि  मेरी बेटी  को  साड़ी  पहनना नहीं   आता  वह  तो  सूट  ही  पहनेगी।उन्होंने  तुरंत हाँ कर  दी  बहुत  उदार  दिल  के  हैं वे लोग।
 बीच  में  ही  बात  काटते  हुए  शर्मा  बहिनजी  बोली,  चलो  अब तो  आपकी  बहूरानी  के  लिए  रास्ता साफ हो गया। अब  तो वह भी सूट  ही पहनेगी। वे तुरंत बोली नही बाबा, कतई नहीं। मुझे तो बहू साड़ी में ही अच्छी लगती हैं।
 साड़ी  पहनकर  सिर पर  पल्लू  लेने  में ही लड़की  बहू नजर आती हैं। वरना बेटी और  बहू  में क्या  फर्क? शर्मा  बहिनजी  की दोतरफा  बाते  सुनकर सभी महिलाएं  स्तब्ध  रह गई।बहु और बेटी  के  लिए सोच  में  कितना  फ़र्क!





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